Friday, 31 March 2017

India's best pure suppliment , your searching is there end now

IPL-10 मे बैंगलोर को लग गया झटका , अब क्या करेंगे विराट कोहली


भारत के सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल कंधे की चोट के कारण अगले माह से शुरू हो रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 10वें संस्करण में नहीं खेल पाएंगे. राहुल को हाल ही में सम्पन्न हुई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान कंधे पर चोट लगी थी.


रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर को लगा बड़ा झटका

वेबसाइट ‘ईएसपीएनक्रिकइन्फो डॉट कॉम’ की रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की टीम के एक सूत्र से यह जानकारी मिली है. राहुल कंधे की सर्जरी के लिए लंदन जाएंगे.राहुल को आस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले मैच के दौरान कंधे पर चोट लगी थी. हालांकि, उन्होंने बाकी के मैचों में इस चोट के साथ खेलना बरकरार रखा. इस श्रृंखला में उन्होंने कुल 393 रन बनाए थे, जिसमें छह अर्धशतक शामिल हैं.


चोट के चलते राहुल हुए बाहर

राहुल के आईपीएल-10 से बाहर होने पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की टीम को दूसरा बड़ा झटका लगा है. इससे पहले टीम के कप्तान विराट कोहली के आईपीएल के शुरुआती मैचों में खेलने पर संदेह जताया जा रहा है.कंधे की चोट से जूझ रहे कोहली आस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के चौथे और अंतिम मैच में मैदान पर नहीं उतरे थे. उन्होंने श्रृंखला समाप्त होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उन्हें पूर्ण रूप से ठीक होने में अभी कुछ सप्ताह लगेंगे. ऐसे में बेंगलोर की टीम में उनकी उपस्थिति पर संशय वाजिब है.
आईपीएल-10 की शुरूआत पांच अप्रैल से हो रही है और पहला मैच कोहली की कप्तानी वाली टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और मौजूदा विजेता सनराइजर्स हैदराबाद के बीच होना है.

Thursday, 30 March 2017

कोर्ट ने किये नोटिस जारी , अब 22000 रुपए सस्ती होंगी सभी कम्पनियों की बाइक


: दुपहिया वाहन कंपनी हीरो मोटो कार्प, एचएमएसआई, बजाज आटो व सुजुकी मोटरसाइकिल BS-III माडलों पर 22,000 रुपए तक की छूट दे रही हैं ताकि एेसे वाहनों को ज्यादा से ज्यादा बेचा जा सके। उच्चतम न्यायालय ने एेसे वाहनों की बिक्री और पंजीकरण पर एक अप्रैल से प्रतिबंध लगा दिया है। डीलरों के अनुसार बीएस-तीन वाहनों पर प्रतिबंध से कुल आठ लाख गाडिय़ां प्रभावित हुई हैं। इसमें 6.71 लाख दो पहिया वाहन हैं। यही कारण है कि कंपनियां ‘भारी भरकम’ छूट देकर ज्यादा से ज्यादा वाहनों को निकालना चाहती हैं।
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया दे रही है भारी छूट
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने इसकी शुरुआत BS-III स्कूटर व मोटरसाइकिल पर 10000 रुपए तक की छूट से की। बाद में इस छूट राशि को बढाकर 22000 रुपए कर दिया गया। कंपनी का कहना है कि वह एक्टिवा 3जी, ड्रीम युग, सीबी शाइन व सीडी 110 डीएक्स पर 22000 रुपए तक की कैशबेक पेशकश कर रही है।  प्रमुख कंपनी हीरो मोटोकार्प ने बीएस-3 दोपहिया वाहनों पर 12,500 रुपए तक की छूट की पेशकश की है। डीलरों के अनुसार कंपनी स्कूटर पर 12,500 रुपए, प्रीमियम बाइक पर 7500 रुपए व शुरुआती स्तर की मोटरसाइकिल पर 5000 रुपए की छूट की पेशकश कर रही है। कंपनी डुएट, माएस्ट्रो एज, ग्लेमर व स्पलैंडर से वाहनों पर छूट दे रही है। वहीं सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया भी लेट्स स्कूटर, जिक्सर बाइक पर छूट दे रही है।
‘उद्योग में अबतक इस तरह की छूट कभी सुनने को नहीं मिला’
बजाज आटो भी अपने विभिन्न माडलों पर छूट व नि:शुल्क बीमा की पेशकश कर रही है। यह छूट 3000 रुपए से 12000 रुपए तक है। बजाज आटो के अध्यक्ष (कारोबार विकास) एस रविकुमार ने कहा,‘ अगर वाहन बचते हैं तो हमारे पास निर्यात का विकल्प होगा।’ फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर्स (एफएडीए) के निदेशक (अंतरराष्ट्रीय मामले) निकुंज सांघी ने कहा, ‘‘उद्योग में अबतक इस तरह की छूट कभी सुनने को नहीं मिला।’’ यह पूछे जाने पर कि शीर्ष अदालत के फैसले के मद्देनजर डीलर क्या कदम उठा रहे हैं, उन्होंने कहा, ‘‘हमारा जोर समयसीमा से पहले यथासंभव अधिक से अधिक वाहनों को बेचने पर है। हमारे लोग संभावित ग्राहकों को कॉल कर रहे हैं और उन्हें छूट के बारे में बता रहे हैं।’’
क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?
 जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, जिन व्हीकल्स में BS-III एमिशन नॉर्म नहीं है, वे एक अप्रैल से नहीं बिकेंगी। ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरर्स के कमर्शियल इंटरेस्ट से ज्यादा जरूरी लोगों की हेल्थ है। बीएस-3 एमिशन स्टेंडर्ड वाले व्हीकल्स एक अप्रैल से चालू हो जाएंगे।
उच्चतम न्यायालय ने कल कहा कि लोगों का स्वास्थ्य विनिर्माताआें के वाणिज्यिक हित से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वाहन कंपनियां इस बात से पूरी तरह अवगत हैं कि उन्हें एक अप्रैल 2017 से केवल बीएस-4 मानकों वाले वाहनों का ही विनिर्माण करना है लेकिन इसके बावजूद वे स्वयं से कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी।

वीराना फिल्म की हिरोइन जैस्मिन को ले गया अंडरवर्ल्ड डॉन या हुया येसा

80 के दशक की बॉलीवुड फिल्म 'वीराना' आज भी लोगो की पहली पसंद है। वैसे, उस दौर में ‘पुरानी हवेली’, ‘बंद दरवाजा’, ‘डाक बंगला’ जैसी कई फिल्में आईं लेकिन 1988 में आई ‘वीराना’ आज भी लोगों को पसंद है। इस फिल्म से एक्ट्रैस जैस्मिन रातोंरात फेमस हो गई थीं। इससे पहले जैस्मिन की सिर्फ दो फिल्में ही आई थीं। 1978 में सरकारी मेहमान और 1984 में 'डाइवोर्स'। '
फिल्म 'वीराना' की रिलीज के बाद जैस्मिन के पास अंडरवर्ल्ड से फोन आने लगे। सभी अंडरवर्ल्ड डॉन उसके साथ हमबिस्तर होना चाहते थे। इस बात से जैस्मिन काफी परेशान हो गई और फिर उन्होंने इंडिया ही छोड़ दिया। कहा जाता है कि फिलहाल वो अमेरिका में हैं और वहीं के एक शख्स से शादी करके खुशहाल जिंदगी बिता रही हैं। 'वीराना' उनकी आखिरी फिल्म थी, इसके बाद वो दोबारा कभी पर्दे पर नजर नहीं आईं।
बता दें कि कहा जाता है कि जैस्मिन के आखिरी दिन गुमनामी के अंधेरे में गुजरे और बाद में उसकी मौत गई। हालांकि कहा ये भी जाता है कि जैस्मिन अभी जार्डन में है और उन्होंने वहीं शादी कर ली है। इन तमाम बातों के बीच ये सवाल आज तक नहीं सुलझा कि आखिर जैस्मिन है कहां?

आशिको के लिये बुरी खबर , अब UP के बाद इन राज्यों मे शुरू होगा एंटी-रोमियो मिशन



हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दी महिला सुरक्षा के लिए कानून बनाने की सलाह
रवि सिंह सिसोदिया, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ओर से हर थाने में गठित ऐंटी रोमियो स्क्वॉड को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सही करार दिया है। सरकार के फैसले में दखल देने से साफ इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा, 'कोर्ट ने कहा है कि इसमें कोई कानूनी या संवैधानिक अवरोध नहीं है। कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए तमिलनाडु व गोवा की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी कानून बनाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि वास्तव में यह मॉरल पुलिसिंग नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव पुलिसिंग यानी ऐसी पुलिसिंग है, जिसका काम महिलाओं के खिलाफ सरेआम छेड़खानी को होने से पहले रोकना है।
याचिका में कहा गया था कि ऐंटी रोमियो स्क्वॉड के जरिये पुलिस लोगों की प्राइवेसी भंग कर रही है और यूथ कपल्स को परेशान कर रही है। जस्टिस ए.पी शाही और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने कहा, 'यदि राज्य सरकार को लगता है कि स्थितियों से निपटने में मौजूदा कानून सक्षम नहीं हैं तो तमिलनाडु और गोवा की तर्ज पर वह मुहिला सुरक्षा के मकसद से नए कानून बना सकती है।' ऐंटी रोमियो स्क्वॉड्स के खिलाफ अधिवक्ता गौरव गुप्ता की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह बात कही।
याचिकाकर्ता ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकार को प्रेमी जोड़ों की निजता में दखल और युवाओं को संदेह की दृष्टि से देखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। याचिका में कहा गया कि इस ऐंटी रोमियो स्क्वॉड के जरिए पुलिस की गलती कार्रवाई से समाज की शांति और सहिष्णुता प्रभावित हो सकती है।

Wednesday, 29 March 2017

Sex education भी हो गयी इस कारण ज़रूरी , इन आंकड़ों ने घुमा दिया सरकार का सिर



दिया की उम्र महज 20 साल है. वह अविवाहित है, लेकिन कैसे गर्भवती हो गई, दिया के मातापिता की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उन से कहां कमी रह गई? क्या दिया की परवरिश में कहीं कोई कमी रह गई थी? क्या वे अपनी जवान हो रही बेटी की हरकतों पर समय की कमी के चलते ध्यान नहीं दे पाए?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक अच्छे कालेज में पढ़ने वाली दिया के मातापिता को जब उस के गर्भवती होने की बात पता चली तो वे सन्न रह गए. उन्होंने तुरंत सामान पैक किया और दिया को ले कर दिल्ली से बाहर दूसरे शहर चले गए, ताकि बात आसपड़ोस या फिर रिश्तेदारों में न फैले. शहर के बाहर उस के पिता ने किसी अच्छे डाक्टर से उस का गर्भपात कराया और कुछ समय तक वहीं होटल में रहे. बाद में उसे दिल्ली वापस ले आए.

यह उदाहरण सिर्फ दिया का ही नहीं है, बदलते समय के साथसाथ यंगस्टर्स की सोच में काफी बदलाव आया है, पश्चिमी सभ्यता उन के सिर चढ़ कर बोल रही है. उम्र का यह दौर ऐसा होता है कि अगर मातापिता बच्चों को कुछ समझाएं तो उन्हें समझ नहीं आता. उन्हें पूरी दुनिया गलत नजर आती है.

एक अनुमान के मुताबिक, भारत की मैट्रो सिटीज से ले कर गांवों तक 25 से 30 फीसदी युवतियां किसी न किसी कारण गर्भपात कराती हैं. ये आंकड़े 25 साल से कम उम्र की युवतियों के हैं. अधकचरी जानकारी में टीनऐज में गर्भपात के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकारी संस्था नैशनल सैंपल सर्वे औफिस के आंकड़ों पर गौर करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में 20 साल से कम उम्र की युवतियों में गर्भपात का प्रतिशत मात्र 0.7 है, जबकि शहरों में यह 14% है.

युवती की बढ़ जाती हैं मुश्किलें

अविवाहिता जब संबंध बनाती है तब क्या सही और क्या गलत है, इस का खयाल तक उस के दिमाग में नहीं आता. तब मन गहरे समंदर में प्यार के गोते लगाता है. इस के दुष्परिणाम तब सामने आते हैं जब कम उम्र में युवती गर्भवती हो जाती है. इस उम्र में न तो प्रेमी शादी के लिए तैयार होता है और न ही प्रेमिका. लिहाजा, दोनों के सामने बस एक ही रास्ता होता है और वह है गर्भपात.

जब यह बात घर वालों को पता चलती है तो पूरे घर में बवंडर आ जाता है जो लाजिमी है, लेकिन इस गलती का युवती को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. उसे न केवल गर्भपात जैसे जटिल दौर से गुजरना पड़ता है बल्कि कई तरह की मानसिक परेशानियों से भी दोचार होना पड़ता है. प्रेमी के बदलते रवैए और घर वालों के तानों से पीडि़ता डिप्रैशन में चली जाती है जबकि कई मामलों में युवती ऐसे हालात में मौत को भी गले लगा लेती है.

कौन है जिम्मेदार

देश में अब टीनऐजर्स के लिए गर्भपात कोई नई बात नहीं है. युवा पहले शादी फिर सैक्स जैसी बातों को अब दकियानूसी मानते हैं और इस की वजह है उन्हें आसानी से सबकुछ उपलब्ध हो जाना, ऐसे में वे क्यों शादी का इंतजार करें और जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाएं.

इस के पीछे मुख्य कारण एकल परिवार भी है, जहां मातापिता दोनों कामकाजी हैं. ऐसे में वे बच्चों पर ज्यादा निगरानी नहीं रख पाते. बच्चे अकेले टीवी पर क्या देख रहे हैं या फोन पर क्या डाउनलोड कर रहे हैं, ये सब देखने की उन्हें फुरसत ही नहीं है. आजकल टीवी और इंटरनैट के माध्यम से सब चीजें उपलब्ध हैं, जिस के दुष्परिणाम आगे चल कर हमारे सामने गर्भपात के रूप में आते हैं.

प्रेमी का व्यवहार भी है इस की वजह

प्यार की शुरुआत में तो सबकुछ अच्छा लगता है और कई बार युवती इस उम्मीद में रिश्ता भी बना लेती है कि उस की प्रेमी से शादी हो जाएगी, लेकिन जब वह गर्भ ठहरने की बात प्रेमी को बताती है तो अधिकतर मामलों में वह प्रेमिका से पीछा छुड़वाने की भरपूर कोशिश करता है. वह न तो बच्चे को अपना नाम देना चाहता है और प्रेमिका से शादी करने से भी मना कर देता है, जिस के चलते युवती के पास सिवा गर्भपात के कोई उपाय नहीं बचता और फिर उसे कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है. इस से न केवल उस का स्वास्थ्य प्रभावित होता है बल्कि मानसिक रूप से भी उसे गहरा सदमा लगता है.

गर्भपात के बाद युवती खुद को अलगथलग महसूस करती है. बारबार उसे लगता है कि उस के साथ धोखा हुआ है. धीरेधीरे उस के व्यवहार पर भी इस का गहरा असर दिखाई देता है.

गलती दोनों की

यदि शादी से पहले कोई युवती गर्भवती हो गईर् है तो इस में सिर्फ उस की ही गलती नहीं है, जितनी दोषी वह युवती है उतना ही दोष उस युवक का भी है. दोनों इस में बराबर के हकदार हैं. हमारा समाज शादी से पूर्व युवती के गर्भवती होने पर उसे कई तरह के ताने जैसे बदचलन, कुलटा, कलमुंही कह कर उस का तिरस्कार करता है, लेकिन उस युवक का क्या, जो गर्भ में पल रहे बच्चे का बाप है? क्या उस का कोई कुसूर नहीं? लिहाजा, किसी एक पर गलती का दोष न डाला जाए तो अच्छा है.

कैसे निबटें ऐसे हालात से

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मौसमी का जूस हमारी सेहत के लिए फायदेमंद होता है. मौसमी का जूस लोग शौक से पीना भी पसंद करते हैं. इसमें विटामिन सी और पोटेशियम जैसे खनिज पाए जाते हैं.
मौसमी की तासीर ठंडी होती है. यह शीतलता प्रदान करता है. यह पित्त भी मारता है. मौसमी का जूस स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है. इसके जूस में ढेर सारा मिनरल और पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन सी और पोटैशियम आदि पाया जाता है.यह हेल्दी होने के साथ ही उर्जा पहुंचाने वाला भी होता है.

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मौसमी जूस पीने से निम्नलिखित फायदे होते है-
1. स्कर्वी रोग से बचाव
यह रोग आमतौर पर अपने आहार में विटामिन सी की कमी के कारण होता है. स्कर्वी के कारण मसूड़ों में सूजन, बार बार फ्लू होना, जुकाम और होंठ का फटना आदि लक्षण होते हैं. मौसमी रस स्कर्वी के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि यह विटामिन सी युक्त एक उच्च सामग्री है.,
2.पाचन शक्ति बढ़ाता है
मौसमी रस की मीठी सुगंध से अत्यधिक मात्रा में लार बनती है, जिससे पाचक रस और एसिड का स्राव होता है जो जल्दी से भोजन को पचाने के कार्य को बढ़ाता है. उस के अलावा मौसमी रस यौगिकों में क्रमिक वृत्तों में सिकुड़ने वाली गति के लिए फायदेमंद होता है.
कब्ज में लाभदायक
मौसमी का रस आंत्र इलाकों में मौजूद विषाक्त पदार्थों को दूर करने के लिए बहुत लाभकारी है. मौसमी के रस में पोटेशियम काफी मात्रा में पाया जाता है जो कि पेट की गड़बड़ी, पेचिश और दस्त में लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है. यह अपने स्वादिष्ट स्वाद के परिणाम के रूप में उल्टी और मतली से बचने में मदद करता है.
त्वचा लाभ
मौसमी का रस त्वचा के लिए बहुत अच्छा है और यह धब्बे और पिंपल्स को दूर करने में मदद करता है. यह भी चेहरे पर एक उज्ज्वल चमक और कांति प्रदान करता है.
 मधुमेह लाभ
मधुमेह रोगियों के लिए मौसमी का रस काफी राहतकारी है और सकारात्मक परिणाम देता है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आंवला रस और शहद के साथ मौसमी रस खाली पेट सुबह के समय में कम मात्रा में लिया जा सकता है.

लड़कियों पर सरकार का नया फॉर्मूला

दोस्तों आज हम आपको बताएँगे की किसी भी लड़की को आसानी से  पटाने का तरीका| १.लड़कियों को बनावटीपन बिल्कुल भी पसंद नहीं होता है, इसलिए उनके ...